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आखिर क्यों है राज्य सरकार शराब कारोबारियों पर मेहरबान ?

उत्तराखंड में लॉकडाउन के दौरान बंद पड़ी शराब की दुकानों के ठेकेदारों को राज्य सरकार द्वारा 196 करोड़ की राहत देने का मामला नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गया है अब मामले में 1 सप्ताह के बाद सुनवाई होगी। आपको बता दें कि देहरादून निवासी उमेश कुमार शर्मा ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार के द्वारा उत्तराखंड के शराब कारोबारियों पर करीब 196 करोड़ का राजस्व यह कहते हुए माफ कर दिया कि लॉकडाउन के दौरान उत्तराखंड में शराब की दुकानें बंद थी जिस वजह से शराब कारोबारियों को नुकसान हो रहा है वही याचिकाकर्ता का कहना है कि लॉकडाउन के चलते उत्तराखंड में केवल शराब के व्यवसायियों को ही नहीं बल्कि सभी प्रकार के छोटे बड़े व्यवसायो को नुकसान हुआ लेकिन राज्य सरकार के द्वारा केवल शराब कारोबारियों को राहत दी गई और सरकार के द्वारा आम जनता के लिए किसी भी प्रकार का कोई छूट का प्रावधान नहीं है लिहाजा सभी कारोबारियों को (आर्टिकल 14) समानता के अधिकार के तहत छूट दी जानी चाहिए,,, याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार एक तरफ विशेष तबके के लोगों को फायदा दे रही है तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों के वेतन भत्तों में करीब 30% की कटौती कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए कर रही है जो गलत है और राज्य सरकार प्रदेश में अलग-अलग वर्गों के लिए भेदभाव पूर्ण नीति अपना रही है,,,आज मामले में सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को 1 सप्ताह के भीतर शपथ पत्र पेश करने के आदेश दिए हैं और याचिकाकर्ता से पूछा है कि वो कोर्ट को बताएं कि आखिर सरकार किस तरह से शराब कारोबारियों और जनता के साथ भेदभाव कर रही है मामले की सुनवाई 1 सप्ताह बाद होगी।

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