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वीआईपी गाँव में देश की आजादी के 72 साल बाद भी नही पहुची,बिजली,सड़क, और फोन की सुविधा।

उत्तराखंड के धारचूला में दारमा वैली के लोग आज भी मोबाइल नेटवर्क से कोसों दूर, अपनों की खुशी और मौत की खबर तक नहीं पहुंच पाती है सीमांत गांव दुगतु में।

भले ही आज देश 5G की तरफ बढ़ रहा हो लेकिन आज भी उत्तराखंड के कई गांव ऐसे हैं जिन गांवों तक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है, तो ऐसे में इन लोगो 5G का क्या फायदा, स्थानीय लोगों को गांव में संचार की सुविधा ना होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भले ही देश को आजाद हुए 72 साल पूरे होने जा रहे हो लेकिन इन 72 सालों में भी उत्तराखंड के सीमांत गांव के लोग आज भी गुलामी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं इन गांवों में आज तक ना तो मोबाइल टावर की सुविधा मुहैया हुई है और ना ही गांव में आज तक बेहतर सड़क,स्वास्थ्य सेवाएं और स्कूल मौजूद है।
अपनी इन मूलभूत सुविधाओं के लिए गांव के स्थानीय लोग पलायन करने को मजबूर हैं ग्रामीण सबसे ज्यादा संचार सेवा से जुड़े ना होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं ग्रामीण कहते हैं कि अगर गांव में कोई बीमार हो जाए या गांव में कोई आपदा आ जाए तो वह अपनी आवाज किसी तक नहीं पहुंचा सकते ग्रामीण यहां तक कहते हैं कि 2013 की आपदा गांव में इतनी भीषण थी कि गांव में कई लोगों की मौत तक हो गई लेकिन संचार सेवा ना होने की वजह से आज तक किसी को यह तक नहीं पता कि गांव में कितनी बड़ी आपदा आई।


इसे गांव वालों की विडंबना नही तो और क्या कहेंगे कि मोबाइल नेटवर्क ना होने से ग्रामीण अपनी सुख और दुख की बातें तक किसी को नहीं बता पाते 2 दिन पूर्व ही गांव के स्थानीय युवक की हार्ट अटैक से बरेली में मौत हो गई और युवक के शव को बरेली से धारचूला करीब 500 किलोमीटर की दूरी तय करके लाया गया इसके बावजूद भी महज 60 किलोमीटर दूर उसके गांव में युवक के माता-पिता को अपने बेटे की मौत का पता नहीं चल सका।
जिसके बाद करीब 50 किलोमीटर की दूरी 5 घंटे में तय करके एक युवक उसके माता-पिता को लेने गांव पहुंचा और तब जाकर युवक की मौत की जानकारी उसके माता-पिता को हुई, इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे कि इतनी बड़ी हृदय विदारक, दुख भरी घटना की सूचना तक गांव वालों तक नहीं पहुंच सकती है।
स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश की सुरक्षा करने वाले सैनिकों तिकड़ी आईटीबीपी को भी मोबाइल नेटवर्क ना होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है आइटीबीपी में तैनात जवान भी लंबे समय तक मोबाइल नेटवर्क ना होने से अपने परिजनों से बात नहीं कर पा रहे हालांकि आइटीबीपी बेस कैंप में सेटेलाइट फोन जरूर है लेकिन उसका प्रयोग वह भी ना के बराबर कर पाते हैं।

क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी कहते हैं कि सरकार की उपेक्षा के चलते आज तक गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच सका है मोबाइल नेटवर्क की मांग को लेकर उन्होंने जंतर-मंतर में धरना भी किया लेकिन उसका भी कोई फल उन्हें नहीं मिल पाया।

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